शनि स्तोत्र (दशरथकृत)

नवग्रह स्तोत्र

नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्॥

Neelanjana-samabhasam Raviputram Yamagrajam. Chhaya-Martanda-sambhootam tam namami Shanaishcharam.

दशनाम स्तोत्र

कोणस्थः पिङ्गलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रोऽन्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलादेन संस्तुतः॥

Konasthah Pingalo Babhruh Krishno Raudro-antako Yamah. Saurih Shanaishcharo Mandah Pippaladena sanstutah.

एतानि दश नामानि प्रातरुत्थाय यः पठेत्। शनैश्चरकृता पीडा न कदाचिद् भविष्यति॥

Etani dasha namani praatar-utthaya yah pathet. Shanaishchara-krita peeda na kadachid bhavishyati.

ऐप में किसी भी गुरुजी से चैट में माँगिए, और जाप माला हर जाप पर टैप करते ही गिनती करती है।

ज्योतिष रुझान बताता है, निश्चय नहीं।

क्या आपकी कुंडली में यह है? ऐप में देखें

आपकी अपनी कुंडली, आपके जन्म विवरण से — और एक गुरुजी जो साथ पढ़ें।

मेरी कुंडली के लिए कौन सा मंत्र ठीक है? — पंडितजीऐप में पंडितजी से बात कीजिए

इससे जुड़े

Google Play पर मुफ़्त इंस्टॉल करें